immune system in hindi

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Our Immune System in Hindi)

संसार की सबसे शक्तिशाली सेना हमारे अंदर है। और ये शतकों से एक युद्ध लड़ती आ रही है। ये सेना है हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली! ये शरीर को रोगजन्तु, बैकटेरिया, वायरस से तो बचाती ही है साथ ही शरीर के अंदर आने वाले कसी भी जहरीले पदार्थ से भी बचाती है। ये प्रणाली हमारे शरीर को फिर से ठीक होने में भी मदद करती है। (Immune system in Hindi means pratiraksha pranali. Ye hame rogo se aur sharir ko kisi bhi khatarnak padarth se bachata hai)

immunity meaning in hindi
Hamare sharir ki kitanuo se ya kisi ghav se bachav ki jo bachav pranali hoti hai, vahi hai immunity meaning in hindi. Immuntity ko rog pratikarak shakti bhi kahte hai

आपने देखा होगा खेलते समय अगर चोट लग जाए तो वहाँ का रंग लाल हो जाता है। ये हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम / immune system) की वजह से होता है। क्योंकि हवा के छोटे से हिस्से में लाखों और नाखून जीतने छोटे सतहों पर करोड़ों सूक्ष्म जीव होते हैं। अगर ये हमारे शरीर में किसी कटाव या किसी अन्य तरीके से चले जाएं तो तेजी से फैल कर, जानलेवा हो सकते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं क्योंकि इम्यून सिस्टम की आर्मी इनके रास्ते में आग की दीवार की तरह खड़ी हो जाती है!

       हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के 2 मुख्य भाग हैं।

  1. सहज प्रतिरक्षा (Innate immunity)
  2. उपार्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity / विशिष्ट प्रतिरक्षा / specific immunity)

सहज प्रतिरक्षा (Innate immunity)

यहाँ आप innate immunity का विडिओ देख सकते हैं।

Innate immunity in hindi

1. पहली परत – हमारी त्वचा

हमारी त्वचा (skin) में पाया जाने वाला केरोटीन नामक प्रोटीन किटाणुओ को मारता है। ये रोग प्रतिकार की पहली परत का एक भाग है। इसके अलावा त्वचा की ग्रंथियों से तेल जैसे द्रव का स्राव होता है ये भी किटाणुओं को रोकने के लिए ही है। ऐसी ही परत हमारे अन्न नलिका और फेफड़ों जैसे अवयवों की भी सुरक्षा करती है। जहां बलगम (mucus) किटाणुओं को फंसा कर (चिपकाकर) निष्क्रिय कर देता है। इसे प्रतिरक्षा प्रणाली का पहला सुरक्षा घेर भी कहते हैं। (It is also called first line of defence of the immune system)


 2. दसूरी परत है श्वेत कणिकाओं की (White Corpuscles in Hindi)

श्वेत कणिकाओं (white corpuscles) में फैगॊसाईट (Phagocytes) मुख्य होते हैं। ये शरीर में आए बाहरी तत्वों को पहचानकर खा जाते हैं! उसके बाद कुछ कोशिकाएं कुछ रसायनों के द्वारा उसे पूरी तरह से साफ कर देती हैं। इसे प्रतिरक्षा प्रणाली का दूसरा सुरक्षा घेर भी कहते हैं। (It is also called second line of defence of the immune system)

immune system in hindi

       इस प्रक्रिया में हिस्टामाईन (histamine) और साईटोकाईन (cytokines) नामके केमिकल निकलते हैं। जिससे उस जगह की नसें फूल जाती हैं और जलन होने लगता है। (ये ऐसा ही है जैसे अपराधियों का पता चलते ही अलार्म बजा दिया गया हो और आसपास का इलाका खाली करवा लिया गया हो ताकि कार्यवाही तेजी से हो सके।)

       लेकिन ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि कौन सी कोशिका (Cell) रोगाणु है और कौन सा शरीर का हिस्सा? ये पहचानना भी आवश्यक है। इसके अलावा कौन सा कण खतरनाक है और कौन सा पोषक तत्व है? ये भी जानना जरूरी है। ताकि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से हमारे ही शरीर की कोई हानि ना हो या कोई जीवाणु बच ना जाए। इसके लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं के प्रोटीन्स के प्रतिरूपों (Pattern) की लगातार जांच करती रहती है। जैसे ही खतरनाक जीवाणुओं के पैटर्न मिलते हैं, ये प्रणाली उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार हो जाती है।

       ये श्वेत कणिकाएं (white blood corpuscles) बोन मैरो में और थायमस (thymus) में बनती हैं। और शरीर के अलग-अलग गांठों में भी जमा होती हैं। उन गांठों को लिम्फ नोड (Lymph Node) कहा जाता है। इसीलिए इस सिस्टम को लिंफेटिक सिस्टम (Lymphatic System) और श्वेत कणिकाओं को लिंफेटिक सेल्स (Lymphatic Cells) भी कहा जाता है। यकृत भी ऐसा ही एक लिम्फ है। इसके अलावा कलेजा (Liver) भी लिम्फ का भी काम करता है।

रोगजंतुओं (microbes) और विषैले पदार्थ कणों (toxins) को पहचानने वाले सूचकों (senses) को पैटर्न रेकॉगनीशन रीसेप्टर (pattern recognition receptors) कहते हैं। ये सहज प्रतिरक्षा (Innate immunity) का एक महत्वपूर्ण भाग है।

ये दोनों परतें हमारी सहज प्रतिरक्षा (Innate immunity) के अंतर्गत आती हैं। इसकी घटक कोशिकाएं हैं- मोनोसाईट, फैगॊसाईट, मैक्रॊफेज, न्यूट्रॊफिल, ईसीनॊफिल, मास्ट सेल, डेंड्रिटिक सेल्स, नैचरल किलर सेल्स, कॉम्पलेमेन्टरी प्रोटीन्स। इनका (Monocytes, Phagocytes, Macrophages, Neutrophils, Eosinophils, Mast Cells, Dendritic Cells, Natural Killer Cells and Complementary Protiens)

(इनका चित्र ऊपर दिया गया है।)

डेंड्रिटिक सेल्स (dendritic cells) – ये स्पेशल कमांडो की तरह होते हैं जो किटाणुओं को पहचानते हैं। उसके अलावा किटाणुओं को नष्ट करने के लिए श्वेत कणिकाओं (white corpuscles) को संकेत (signal) देते हैं, किटाणुओं को नष्ट करते हैं और उसकी जानकारी भी जुटाते हैं। इस जानकारी का उपयोग उपार्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity) में होता है।

मास्ट सेल, (Mast Cells) द्वारा छोड़े हिस्टामाईन (histamine) की वजह से सूजन होती है। मैक्रॊफेज (Macrophages) छोड़ते हैं साईटोकाईन (cytokines) नामक रसायन जिसकी वजह से जलन होती है। लेकिन इन्हीं प्रक्रियाओं की वजह से हमारी इम्यून कोशिकाएं तेजीसे किटाणुओं को नष्ट कर पाती हैं।

       फैगॊसाईट, मैक्रॊफेज, न्यूट्रॊफिल, ईसीनॊफिल, मोनोसाईट (phagocytes, macrophages, neutrophils, Eosinophils, monocytes) ये मुख्यता से किटाणुओ को नष्ट करते हैं। ज्यादातर समय ये किटाणुओ को खा जाते हैं! 😀

[ye White Corpuscles in Hindi ki bahot jaruri jankari hai jo ki Immune System in Hindi ko samajhne ke liye avashyak hai]


उपार्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity / विशिष्ट प्रतिरक्षा / specific immunity)

ये प्रतिरक्षा प्रणाली की तीसरी परत है। इसे उपार्जित प्रतिरक्षा प्रणाली (Acquired immune system) या विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रणाली भी कहते हैं, इसमें मुख्यतः दो प्रकार के सेल्स अर्थात कोशिकाएं होती हैं।

उपार्जित प्रतिरक्षा (acquired immunity in Hindi)

जिनमें एक हैं टी-सेल्स (T-Cells) और दूसरे हैं बी-सेल्स (B-Cells)। इसे प्रतिरक्षा प्रणाली का तीसरा सुरक्षा घेर भी कहते हैं। (It is also called third line of defence of the immune system)

बी-सेल्स (B-Cells in Hindi)

बी-सेल्स (B-Cells) एंटीजेन्स (Antigens) को पहचान कर उन्हें नष्ट करते हैं। एंटीजेन्स  साधारणतः शरीर के लिए खतरनाक तत्वों या कणों को कहते हैं, जिसमें वायरस बैक्टीरिया और दूसरे विषैले तत्वों का समावेश होता है। 

B-Cells in Acquired immunity

      बी-सेल्स (B-Cells)  में विशिष्ट प्रकार के प्रोटीन होते हैं जिन्हें रिसेप्टर कहा जाता है और ये एंटीजेन्स का (खतरे का) पता लगाते हैं।  अगर हमारे खून में या शरीर के किसी हिस्से में कोई खतरनाक एंटीजेन मिलता है, तो  वह बी-सेल (B-Cell) जिसके रिसेप्टर ने उसका पता लगाया, वो खुद के ही खूब सारे प्रतिरूप (clones) बनाने लगता है। इसे क्लोनिंग कहते हैं। इसमें से कुछ प्रतिरूप ऐसे प्रोटीन को तैयार करते हैं जो उन वायरसेज (या बैक्टीरिया) को पकड़ लेते हैं।  इन प्रोटीन्स को एंटीबॉडीज (Antibodies) कहते हैं।   इसके बाद उन खतरनाक तत्वों को नष्ट कर दिया जाता है। 

एंटीबॉडीज बनाने के लिए कुछ बी-सेल्स का आकार बड़ा हो जाता है और जब सफलतापूर्वक   वे कीटाणु नष्ट हो जाते हैं तब वे बी-सेल्स भी नष्ट हो जाते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। आगे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली बड़ी बुद्धिमानी से कम करती है!

सारे बी-सेल्स नष्ट नहीं होते। उस बी-सेल् (B-Cell)  के कुछ प्रतिरूप भविष्य में  हमारी प्रतिरक्षा के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। उस जानकारी का उपयोग तब होता है जब उसी तरह का कोई कीटाणु दोबारा शरीर को नुकसान करने की कोशिश करें।   ऐसे में वे बी-सेल्स बड़ी तेजी से एक्टिव हो जाते हैं और बहुत कम समय में उस खतरे को नष्ट कर देते हैं।

इस बचाव प्रक्रिया को ह्यूमरल प्रतिरक्षा भी कहते हैं (humoral immunity, or antibody mediated immunity)।

[ye B-Cells in Hindi ki jaruri jankari hai jo ki Immune System in Hindi ko samajhne ke liye bahot avashyak hai]


टी सेल्स T-Cells

विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रणाली के दूसरे घटक होते हैं टी सेल्स (T-Cells)।  इन टी सेल्स के भी दो मुख्य प्रकार हैं जिनमें से एक है साइटोटॉक्सिक टी सेल और दूसरा है हेल्पर टी सेल।

T - Cells Specific Immunity

साइटोटॉक्सिक टी सेल्स (Cytotoxic T-Cells)-

अगर प्रतिरक्षा की दूसरी प्रणालियों से कोई किटाणु बच जाए और शरीर के  किसी दूसरी कोशिका को संक्रमित कर दे तो उसे खत्म करने का काम  साइटोटॉक्सिक टी सेल्स (Cytotoxic T-Cells) करते हैं.  वह संक्रमित कोशिका संकेत देती है जिसे टी सेल्स पहचान लेते  हैं और विशिष्ट रसायनों के द्वारा उस संक्रमित कोशिका को और उसके साथ उसके किटाणुओ को भी (या वायरस जो भी हो उसे) नष्ट कर देते हैं। कैंसर सेल्स को भी टी सेल्स ऐसे ही खत्म कर देते हैं। यह रसायन है परफॉरेन और ग्रैंजाइम्स (perforins and granzymes )। इनमें से कुछ T-Cells मेमोरी सेल्स बन जाते हैं और भविष्य में उसी प्रकार का खतरा फिर से उत्पन्न होते ही तेजी से प्रतिक्रिया कर के रोगजंतुओं को नष्ट कर देते हैं।


हेल्पर टी-सेल्स (Helper T-Cells)

हेल्पर टी-सेल्स साइटोकाईन नाम के रसायन के द्वारा बी-सेल्स और साइटोटॉक्सिक टी सेल्स को  सिग्नल देते हैं और  उत्तेजित (एक्टिवेट) करते हैं।  यह ऐसे ही है जैसे किसी देश का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट हो! जानकारी जुटाने का काम, खतरे का पता लगाना और दूसरी श्वेत कणिकाओं को सतर्क करने का कम मुख्यता से हेल्पर टी-सेल्स (Helper T-Cells) ही करते हैं। इसीलिए रोग प्रतिकार के लिए यह बहुत आवश्यक हैं।

 इसके अलावा कुछ कंप्लीमेंट्री  प्रोटींन्स (Complimentary Protiens) भी होते हैं जो इन श्वेत कणों को (White Blood Corpuscles / व्हाइट ब्लड कॉरपसल्स को) बनने में मदद करते हैं। साथ ही कंप्लीमेंट्री प्रोटींन्स क्षतिग्रस्त कोशिका (अर्थात डैमेज सेल्स) को ठीक करने में भी मददगार होते हैं।  इसके अलावा प्लेटलेट्स (Platelets) खून के बहाव को रोकने में भी मदद करते हैं। कुछ रोगों में जब श्वेत कणिकाओं को तेजी से बनना होता है तब भी हमारा शरीर इन प्लेटलेट्स का उपयोग करता है इसीलिए डेंगू जैसे रोग में कभी-कभी प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है।

अगर हम शरीर को घर कहें तो प्लेटलेट्स (Platelets) कच्चे मिट्टी की तरह हैं। जो जरूरत के हिसाब से फर्श को समतल करने के लिए या दीवार को सहारा देने के लिए लगाई जा सकती है। या उसी मिट्टी से ईट बनाकर दीवाल भी बनाई जा सकती है।


प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत बनाने के उपाय

इम्यून सिस्टम पर असर डालने वाले फ़ैक्टर्स

इम्यून सिस्टम नाम की  यह आर्मी (हमारे हिसाब से) संसार में सबसे शक्तिशाली है।  लेकिन किसी भी आर्मी को अगर सही मात्रा में और शक्तिशाली हथियार ना मिले तो वो कमजोर हो जाती है। उस देश का राजा (या उस आर्मी का लीडर) खुद कमजोर हो  या दुविधा में (Confuse) हो तब भी वह आर्मी कमजोर पड़ जाती है। 

immune system ko majboot kaise kare

 यही हाल है हमारे इम्यून सिस्टम का भी अगर हमने ठीक से खाना नहीं खाया और हमारे शरीर को प्राकृतिक पोषक तत्व नहीं मिले तो वह कमजोर हो सकता है। या अगर हम तनाव में रहे तो हमारा शरीर इम्यून सिस्टम को पर्याप्त ऊर्जा नहीं दे पाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। इसलिए अगर सही तरह का खाना खाकर और सकारात्मक सोच रख कर हम अपने प्रतिरक्षा प्रणाली (अर्थात इम्यून सिस्टम) को मजबूत बना सकते हैं।


प्रतिरक्षा प्रणाली पर व्यायाम का असर (effect of physical exercise on Immune System)

immune system kaise badhaye

(आप इस फोटो को pexels.com से डाउनलोड कर सकते हैं। उसके लिए यहाँ क्लिक करें)

अगर कोई सेना शक्तिशाली तो है पर युद्ध के समय वह ठीक से तैयारी नहीं कर पाती या समय पर हथियारों को नहीं ले जा पाती तो भी वह हार जाएगी।  ऐसे ही हमें अपने शरीर को भी  कीटाणु या किसी भी प्रकार के दुश्मन के हमले के लिए तैयार रखना चाहिए। यह तैयारी हम कर सकते हैं व्यायाम से! व्यायाम से  सारा शरीर तो मजबूत होता ही है लेकिन सबसे ज्यादा फायदा होता है हमारे दिमाग और प्रतिरक्षा प्रणाली को। क्योंकि ये दोनों ही चीजें (दिमाग और प्रतिरक्षा प्रणाली) इन्हें बहुत ज्यादा ऊर्जा की, शक्ति की आवश्यकता होती है। ये मिलता है मतलब खून के सही  प्रवाह (Blood Circulation) से। प्राणायाम से भी इम्यून सिस्टम और दिमाग दोनों को ही मजबूत बनाया जा सकता है। 


इम्यून सिस्टम के लिए खाना (food for immune system)

immunity badhane wale khadya padarth

(इस फोटो को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें)

प्राकृतिक और ताजा खाना ये हमारे शरीर के लिए बहुत अच्छा है और साथ में कुछ फल भी ग्रहण करने चाहिए।  फल तब ज्यादा असर करते हैं जब उन्हें उन्हीं के मौसम में खाया जाता है।  उदाहरण के लिए अगर आप अमरुद को ठंड में खाएं तब वह ज्यादा फायदा करेगा, ऐसे ही आम गर्मी में भोजन के बाद खाएं तो भोजन पचाने में भी मदद करेगा।

एक और ध्यान देने वाली बात है कि मांसाहार से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। क्योंकि जानवर के मरने के वक्त और उसके बाद उनके शरीर में जहरीले और तनाव उत्पन्न करने वाले रसायन बनते हैं। जो कि इंसान के प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए बहुत ही खतरनाक होते हैं।

इम्यून सिस्टम के हिसाब से देखा जाए तो आंवला एक अमृत की तरह है क्योंकि इसमें  सबसे ज्यादा पोषक तत्व और मिनरल्स होते हैं। यह शरीर के हर हिस्से को फायदा करता है।  हल्दी और अदरक तो इम्यून सिस्टम के लिए अच्छे हैं ही।


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