आर्यन इन्वेजन थिअरी – आपका ब्रेनवाश किया गया है? (History of Arya in Hindi)

History of Arya in Hindi

आपको आर्यन इन्वेजन थिअरी (history of arya) में बताया जाता है कि आपके पूर्वज बाहर से आए थे। लेकिन कहा से आए थे इसका जवाब हर किसिका अलग है और सबूत एक भी नहीं। इतिहास में कहा जाता है कि आर्य बंजारे थे लेकिन हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, द्वारिका और ऐसे कई प्राचीन शहरों (Indus Valley Civilization) के अवशेषों ने साबित कर दिया कि वे बहुत विकसित शहरों में रहा करते थे

indus valley civilization in hindi
(These artifacts are the proof that we still don’t fully understand the indus valley civilization. I believe that this our own civilization which is the oldest and in many aspects, very advanced. You will know here more about indus valley civilization in hindi)

इस थिअरी में कहा जाता है कि यहां के मूल निवासी द्रविड़ थे और आर्यों ने उन्हें दक्षिण भारत में भगा दिया। लेकिन फिर सवाल यह उठता है कि अगर उत्तर भारत से भगाया तो दक्षिण भारत से क्यों नहीं? अगर द्रविड़ और बाकी हिंदू दुश्मन हैं तो दोनों का धर्म एक ही – वैदिक धर्म क्यों है? दोनों के इष्ट देव ब्रम्हा, विष्णु और महेश ही क्यों हैं? अगर संस्कृति अलग होती तो देवता भी अलग अलग होते।

history of arya in hindi
You can clearly see the glory of Indian Civilization in these Architectures

फिर ये गलत धारणाएं आई कहां से?

इसका एक कारण है मिसिंटरप्रिटेशन (तथ्यों का सही अर्थ ना निकाल पाना)। उदाहरण के लिए – आपने कई बार सुना होगा की हिन्दुओं में तैंतीस करोड़ देवी देवता हैं! जैसे देवी देवता ना हुए रेत के कण हो गए! ग्रंथों में तैंतीस कोटि के देवताओं का उल्लेख किया गया है। कोटि एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘लेवल’ मतलब श्रेणी जैसे कर्मचारियों की मजदूर सुपरवाइजर मैनेजर जैसी श्रेणियां होती हैं, पुलिस में, नेताओं में एमएलए, एमपी, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधान मंत्री जैसी श्रेणियां होती हैं वैसे ही तैंतीस श्रेणियों के देवता होते हैं जिसे तैंतीस करोड़ कहा जाने लगा कोई नहीं जानता कि तैंतीस करोड़ देवी देवता कौन हैं लेकिन तैंतीस श्रेणियों के देवताओं में – आठ वसु, ग्यारह रुद्र, 12 आदित्य, 1 इंद्र एवं 1 प्रजापति हैं।

An image about indus valley civilization in hindi

इनमे आठ वसु हैं : धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष एवं प्रभाष। ग्यारह रूद्र हैं : हर, बहुरूप, त्र्यम्बक, अपराजिता, वृषाकपि, शम्भू, कपर्दी, रेवत, म्रग्व्यध, शर्व तथा कपाली। बारह आदित्य हैं : धाता, मित्, अर्यमा, शक्र, वरुण, अंश, भग, विवस्वान, पूषा, सविता, त्वष्टा, एवं विष्णु। एक इन्द्र और एक प्रजापति ये जानकारी आपको याज्ञवल्क्य द्वारा लिखित वृहदारण्यक उपनिषद में भी मिल जाएगी।

इसी तरह कई गलत अर्थ निकाले जाने की वजह से हमारी संस्कृति के विरुद्ध प्रश्न खड़े हो जाते हैं। लेकिन यही इन गलत धारणाओं का मुख्य कारण नहीं है। अगर किसी शक्तिशाली दुश्मन को हराना हो तो क्या उससे सीधे टक्कर ली जाती है? या उसे हराने का उपाय खोजा जाता है? यहीं भारतीयों के साथ भी किया गया!

(This is the biggest reason for the decline of Indus Valley Civilization.)


भारतीय संस्कृति के खिलाफ किसने षड्यंत्र किए?

decline of indus valley civilization

भारत के इतिहास को जान बुझ कर बदला गया, किताबों में मिलावट की गई, झूठी धारणाएं फैलाई गईं ताकि भारतीय कमजोर हो जाएं और दुश्मन इसका फायदा उठा सके। ईसवी सन की गणना से पहले तक भारत बहुत ही समृद्ध हुआ करता था। इसकी समृद्धि से आकर्षित होकर बहुत से जिज्ञासु लोग हमारी संस्कृति के बारे में जानने आते थे, हमसे सीखना चाहते थे। लेकिन इसी समृद्धि को लूटने के लिए अनगिनत बार बाहरी देशों ने भारत पर हमला भी किया जिनमें से सिकंदर भी एक था। उनमें से कोई भी भारत को गुलाम बनाने में सफल नहीं हो सका।

लेकिन सोलहवीं सदी में आश्चर्यजनक रूप से भारतीय हारने लगें और मुघल भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने में कामयाब हो गए। धीरे धीरे मुघलों ने पूरे उत्तर भारत के साथ भारत के ज्यादातर हिस्से को गुलाम बना लिया। उसके बाद अंग्रेजों ने लगभग सारे भारत को गुलाम बना लिया और जिस हिस्से पर पूरा कब्जा नहीं कर सके वहां के शासकों को अपनी तरह तरह के समझौतों से बांध दिया। अब यहां अंग्रेज और मूघल कहां से आ गए? बात तो हमारे पूर्वजों की हो रही थी – क्योंकी उन अंग्रेजों और मुघलों ने ही हमारे इतिहास को प्रभावित किया है। इसीलिए हमारे इतिहास के बारे में गलत धारणाएं जान बूझकर फैलाई गई, हजारों किताबों को जला दिया गया और बहुत सी किताबो में झूuठी बातें जोड़ी गई और गलत मतलब निकाला गया! हमारे पूर्वजों को बाहरी साबित करने की कोशिश भी इसी षड्यंत्र का हिस्सा है। आर्य कोई अलग और भारतीय कोई अलग नहीं है। जैसे आज के जमाने में अच्छे लोगो को चरित्रवान, सज्जन जैसी अलग अलग उपमाएं दी जाती हैं वैसे ही प्राचीन समय में उच्च विचार वाले सज्जन व्यक्तियों को आर्य कहा जाता था।

(These changes in and intrusion of false information led to the misinterpretation of the history of arya in. Here you can read many important facts about history of arya in hindi)


लेकिन ऐसा क्यों किया गया?

glory of indus valley civilization
You can take a glimpse of rich culture of Historu of Arya

भारत का ज्ञान, समृद्ध समाज व्यवस्था, देश के लिए समर्पण भाव और आत्मविश्वास ही वो शक्ति थी जिसकी वजह से मुगलों से पहले कोई भी आक्रमण-कारी भारत पर कब्जा नहीं कर सका। ये बात मुगल समझ गए थे इसीलिए उन्होंने हमारे संस्कृति और धर्म को बदलने के कई तरह के प्रयास किए। भारतीयों को अपना धर्म परिवर्तन कर के मुसलमान बनने पर मजबुर किया और इसका विरोध करने वाले लाखो लोगो की हत्याएं कर दीं!

अंग्रेज़ तो मुघलों से भी आगे निकल गए और हमारे इतिहास में ही मिलावट करके उसे बदल दिया, तक्षशिला जैसी दुनिया की सबसे पुरानी विश्वविद्यालय जो भारत में थीं, उन्हें लाखों किताबो के साथ जला दिया। जो भारतीय अपने अपने वर्णों के अनुसार अपने अपने काम में माहिर थे उन्हें खुद पर ही शक करने को मजबुर कर दिया और एक दूसरे के खिलाफ भड़का दिया। इसी वजह से भारत के चट्टान जैसे लोग रेत जैसे बिखर गए और इतने कमजोर हो गए की बाहरी आक्रमणकारी बाढ़ ने उन्हें बहा दिया! अगर भारत की चार वर्णों वाली संस्कृति सच में गलत होती तो फिर भारत सोने की चिड़िया कैसे बनता? यहां के लोग सुखी और संपन्न कैसे होते?

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(This is a project researched by Shivangi from Standard XI, Army Public School Bolarum)

God of History of Arya
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